Major Puran Singh, VrC(Posthumous), 13 Grenadiers

On 30 November 1965, IC-6391 Maj Puran Singh, Officer Commanding Charlie Squadron and Commander of Tanot post, while going on a liaison visit to Sadhewala post was ambushed on way, west of village Sadrau. All the occupants of Jeep were killed by enemy machine-gun fire from both sides of the track.Major Puran Singh got a burst and more than 20 bullet injuries on the right leg, and a skull injury. He still managed to come out of the Jeep and crawled for approximately 30 yards to get behind cover. He was later on picked by the patrol which was sent immediately from Tanot, on hearing the enemy fire. He was brought alive but succumbed to injuries. Maj Puran Singh played steller role in the capture of Shahgarh and also participated in operations at Sadhewala and Tanot. For these gallant actions, Late Major Puran Singh was awarded VEER CHAKRA (Posthumously).

He was a Bika Rathore Rajput.

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Last letter written by Major Puran Singh VrC, 13 Grenadiers to his father

अन्तिम पत्र
पिता के नाम…
श्रीमान पूज्य पिताजी,

आपके च्रणो में प्रणाम, आप की व श्री जगदंबा की कृपा से राज़ी खुशी हूँ | आपकी खुशिया तो आज आसमान से बरस रही हैं, शाहगढ़ के बाद एक ओर आपने सुन ही लिया होगा सादावाला भी ले लिया ओर दुश्मन को पूछ दबा के भागना पड़ा ओर बहुत नुकसान उठाना पड़ा | अपनी कंपनी तो जगदम्बा की कृपा से बिल्कुल ठीक है | यह काफला जहा जाता दुश्मन के छक्के छूट जाते हैं | सादेवाले से दुश्मन को मार भगाया ही था कि तनोट पर हज़ारो दुश्मनो ने हज़ारो आदमियों से घेरा डाल दिया ओर तोपखाने के गोलों व मोटोरो के गोलों की बोच्छार शुरू करदी लेकिन यह राठौड़ बच्चा बीका जी की औलाद कहा डरने वाला था डॅटा रहा |

मुझे उसी समय आखरी काम सादेवाले पर थोडा करना था जल्दी ख़तम कर ओर अपना काफला ले चल पड़ा हालकि उंटों को पाँच दिन हो गये थे पानी चारा मिले ओर जवानो को तीन दिन से रोटी पानी नही मिला था | लेकिन शूर-वीरता उनकी आखो से बरस रही थी ओर खून उबल रहा था | दिन ढलते ही जा पहुँचे, घेरा तोड़ डाला, फिर भी रात भर ओर कल दिन भर लड़ना पड़ा | दुश्मन की लाशे चारो ओर सड़ रही हैं ओर भाग गया अपनी मुँह की ख़ाके | यह जगदम्बा का मंदिर है वो कहा आने देती | अपना किसी का बाल भी बांका नही हुआ | आज शांति से काका भतीजा दारू से खुशियाँ मना रहे हैं बाकी बच्चों को प्यार करना |

आपका प्रिय पुत्र पूरण

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